निपुण आकलन में प्रदेश में नंबर वन बना देवरिया: जिले के 78 फीसदी विद्यार्थियों की हुई जांच, भागलपुर ब्लॉक ने भी लहराया परचम

परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की सीखने की क्षमता परखने के लिए हुए निपुण आकलन में देवरिया ने प्रदेश स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। जिले में कुल 1,22,241 विद्यार्थियों में से 95,616 का आकलन किया गया। इसमें 78 प्रतिशत उपलब्धि रही। वहीं, विकासखंड भागलपुर ने 99 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश के सभी विकासखंडों में पहला स्थान हासिल किया है। अगस्त में शिक्षकों, एआरपी और एसआरजी की टीमों ने विद्यालयों में पहुंचकर मोबाइल आधारित निपुण प्लस ऐप के जरिए विद्यार्थियों की दक्षता जांची।
जिले में कुल 2,121 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। अगस्त में बालवाटिका से कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों को निपुण आकलन के दायरे में शामिल किया गया। जिले के 1,865 विद्यालयों में बच्चों की शैक्षिक दक्षता जांची गई। इनमें 616 विद्यालय ऐसे रहे, जहां सभी विद्यार्थियों का आकलन पूरा किया गया। कुल 95,616 विद्यार्थियों का आकलन होने से जिले की उपलब्धि 78 प्रतिशत रही।
बीएसए ने टीम को दी बधाई
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य ने इस प्रदर्शन पर शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, एआरपी, एसआरजी और अकादमिक टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयास और बच्चों के प्रति टीम की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उनके मुताबिक, इसे केवल आंकड़े के रूप में नहीं देखना चाहिए। बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता में लगातार सुधार की जिम्मेदारी के तौर पर लेना होगा।
सुधार पर दिया जाएगा जोर
विकासखंड भागलपुर ने 99 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश के सभी विकासखंडों में पहला स्थान हासिल किया। यहां 103 विद्यालयों में से 74 में सभी विद्यार्थियों का आकलन पूरा किया गया। विकासखंड में कुल 6,077 विद्यार्थियों के सापेक्ष 5,983 विद्यार्थियों का यूनिक असेसमेंट किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी सूरज कुमार ने कहा कि प्रदेश में पहला स्थान मिलना गौरव की बात है। उन्होंने इसे प्रधानाध्यापकों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, एआरपी और अकादमिक टीम के सामूहिक प्रयास, सतत अनुश्रवण और बच्चों के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि अब इस प्रदर्शन को बनाए रखने के साथ विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में और सुधार पर जोर दिया जाएगा।
शिक्षकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
निपुण भारत मिशन का उद्देश्य बच्चों को कक्षा-स्तर के अनुरूप बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षताओं में निपुण बनाना है। इसके लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्यालयों में नियमित निरीक्षण और अनुश्रवण के जरिए बच्चों की शैक्षिक प्रगति पर नजर रखी जा रही है। आकलन से सामने आए परिणामों के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर विद्यार्थियों की दक्षता बढ़ाने के लिए सुधारात्मक प्रयास किए जाएंगे।











